Pregnancy Symptoms in Hindi – गर्भावस्था के लक्षण, प्रेगनेंसी का पहला महीना

दोस्तों, इस पोस्ट में हम जानेंगे Pregnancy Symptoms in Hindi, गर्भावस्था के लक्षण (Pregnancy Ke Lakshan), प्रेगनेंसी का पहला महीना, Ladki Pregnant Kab Hoti Hai, और इससे जुडी साड़ी जानकारियां और भी बहुत। तो जुड़े रहिये हमारे साथ पोस्ट के अंत तक।

क्या आपका समय के हिसाब से मासिक धर्म रुक गया है? अगर आपका मासिक धर्म रुक गया है तो आप प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षणों से गुजर रही है। क्योकि ऐसा शोध में पाया गया ही की जिसका मासिक धर्म समय के हिसाब से बंद हो जाता है। उसमे प्रेगनेंसी का शुरूआती लक्षण हो सकता है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है क्योकि बाजार में बहुत सारे प्रेगनेंसी जांच करने के लिए किट आते है, जिससे आपको सच में पता चल जाता है की आप प्रेग्नेंट है या फिर नहीं। बहुत ऐसी महिलाये होती है जिनको प्रेगनेंसी के दौरान अलग-अलग लक्षण महसूस होते है, परन्तु बहुत सारी महिलाओ का लक्षण एक सामान भी होता है। जैसे की –

  • स्तन में दर्द होती है।
  • सुबह की बीमारी हो सकती है, मतलब उल्टी होना।
  • अधिक बार पेशाब लगना।
  • शरीर में थकान और तनाव होने लगता है।
  • हार्मोन में बदलाव।
  • खट्टे खाने का मन करना।
  • मन घबराना या फिर मन मिचलना इत्यादि हो सकता है।

ऐसे बहुत सारे लक्षण है जिसको मै अपने इस लेख में बताने जा रहा हूँ। जिससे आपको पता चल जाएगा की आप प्रेग्नेंट है या नहीं। लक्षणों को Details में जानने के लिए आपको मेरे इस पोस्ट को ध्यान पूर्वक पढ़ना होगा।

Pregnancy in Hindi

बच्चे का जन्म महिलाओं के जीवन में एक नई तरह की खुशियां लेकर आता है। नौ महीने की अवधि में महिला का जीवन पूरी तरह से बदल जाता है। इस अवधि के दौरान महिला निम्नलिखित pregnancy ke lakshan और संकेतों से पीड़ित होती है। गर्भावस्था के शुरुआती महीने में, एक महिला को निश्चित रूप से पता नहीं चल सकता है कि वह गर्भवती है या नहीं। ऐसे में डॉक्टर उसके आखिरी मासिक धर्म की तारीख की पुष्टि करते हैं और गर्भावस्था का निर्धारण करते हैं।

9 month pregnancy in hindi

कुछ मामलों में, मासिक धर्म के प्रवाह में रुकावट के कारण गर्भावस्था हो सकती है, हालांकि मासिक धर्म देर से भी हो सकता है। चूंकि पुरुष का शुक्राणु महिला के अंडे को निषेचित करता है इसलिए भ्रूण का विकास नहीं होता है और महिला गर्भवती नहीं होती है। इस लेख में, हम जानेंगे pregnancy ke bare mein और प्रेगनेंसी का पहला महीना पूरी तरह से।

Pregnancy Symptoms in Hindi (गर्भावस्था के लक्षण हिंदी में)

दोस्तों इस पोस्ट में हम detail में जानेंगे Pregnancy Symptoms in Hindi, गर्भावस्था के लक्षण व संकेत हिंदी में, प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण (Early Pregnancy Symptoms).

Pregnancy Symptoms in Hindi: प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण

निचे दिए गए संकेत और Pregnancy Symptoms in Hindi, प्रेगनेंसी के पहले महीने में शारीरिक बदलाव को ध्यान से पढ़िए।

  • पीरियड्स बंद हो जाना – अगर आपका समय पर पीरियड्स नहीं आती है और आपका पीरियड्स बंद हो जाता है तो आपके लिए यह प्रग्नेन्सी का शुरूआती Pregnancy Symptoms हो सकता है। परन्तु कई बार क्या होता है की शारीरिक समस्याओ के कारन भी आपका पीरियड्स रुक जाता है। और आप घबरा जाती है की मै प्रेग्नेंट तो नहीं हूँ, तो अब घबराने की ज़रूरत नहीं है। क्योकि मार्केट में ऐसे बहुत सारे किट उपलब्ध है, जिसकी सहायता से आप पता लगा सकती है की आप प्रग्नेन्सी की दौर से गुजर रही है या फिर नहीं।
  • उल्टी करना – उल्टी करना प्रग्नेन्सी का यह भी एक शुरूआती लक्षणों में से एक है। आपको खाने- पिने की चीजो से महक आने लगाती है और आप उलटी कर देते है। ज्यादातर उल्टी महिलाओ को सुबह के वक्त होता है। परन्तु बहुत ससरी महिलाये इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेती है, जिसके कारन वह गर्भवती रह जाती है। इसलिए महिलाओ को ज्यादा उल्टी आने पर किट की सहायता से जांच कर लेना चाहिए की वह गर्भावस्था में है या फिर नहीं।
  • जी मिचलाना और चक्कर आना – बहुत ऐसी महिलाओ को प्रग्नेन्सी के दौरान जी मिचलाना और चक्कर आने की समस्या हो सकती है। परन्तु आपको चक्कर शारीरिक कमजोरी के दौरान भी आ सकती है। इसलिए इस समस्या में प्रग्नेन्सी किट का उपयोग कर लेना ही आपके लिए बेहतर होगा।
  • थकान महसूस करना – शारीरिक थकान महसूस करना भी प्रग्नेन्सी की शरुआती pregnancy ke lakshan की पहचान मन जाता है। शुरूआती गर्भवस्था में हार्मोन प्रोजेस्टेरोन (Hormone progesterone) बढ़ जाने के कारण आपको थकान महसूस होने लगता है, जिसके वजह से आपको नींद अधिक आती है।
  • सुबह की बीमारी (Morning Sickness) – सुबह की बीमारी जो प्रेग्नेन्सी के दौरान यह ज्यादातर सुबह में देखी जाती है, इसका लक्षण प्रेग्नेन्सी के लगभग एक महीने बाद दिखाई देती है। बहुत सारी महिलाओ में इसका असर जल्द ही दिखाई देने लगता है तो बहुत सारी महिलाओ में इसका असर बाद में दिखाई देता है।
  • स्तन में दर्द, स्तन का रंग परिवर्तन तथा स्तन भारी होना – क्या आप जानती है की प्रग्नेन्सी के दौरान आपकी स्तनों के निप्पल में दर्द होने लगता है तथा उसके साथ ही आपके निप्पल का रंग भूरा से काला होने लगता है। और आपकी स्तनों में कोमलता आ जाती है। और आपका स्तन धीरे-धीरे भरने के साथ ही भारी भी होने लगता है। किन्तु समय के साथ यह समस्या थीक भी हो जाता है।
  • मिजाज में अस्थिरता – Pragnancy ke shuruaati lakshan में से एक मिजाज में अस्थिरता भी है। जिसमे महिलाए बिना कारणवश वह कभी रोने लगती है, तो कभी हँसने लगाती है तथा उनके व्यवहार में भी अस्थिरता देखी जाती है। यह सभी बदलाव शरीर में हार्मोन के कारन होती है, यह समस्या लगभग सभी प्रग्नेंट महिलाओ को होता है।
  • सिर दर्द और सिर भारी होना – प्रग्नेन्सी में आपका सिर दर्द तथा भारी होने लगता है। यह समस्या शरीर में रक्त के वृद्धि के कारन होता है, याद रखे अगर आपको बराबर सिर दर्द और भारी होने की समस्या बनी रहती है तो यह प्रग्नेन्सी की लक्षण नहीं हो सकता है। इसमें आपको डॉक्टर का सलाह लेना चाहिए।
  • बार-बार टॉयलेट जाना – मासिक धर्म का रुक जाना और बार-बार टॉयलेट जाना यह भी गर्भवस्था का शुरूआती लक्षणों में से एक है। क्योकि प्रग्नेन्सी रुक जाने के बाद आप गर्भ धारण कर लेती है, उसके बाद आपकी रक्त में वृद्धि होने लगता है, जिसकी वजह से यह महिलाओ को समस्या झेलनी पड़ती है।
  • खाने की इच्छा में बदलाव या कमी – प्रग्नेन्सी की शुरुआत लक्षणों में से एक खाने की इच्छा में बदलाव या कमी भी प्रग्नेन्सी के दौरान महिलाओ को वह सभी चीजे अच्छा लगती है, जो सामान्य होने पर अच्छा नहीं लगता है। इस समस्या में महिलाओ को अपनी पसंदीदा भोजन अच्छा नहीं लगता है। इस दौरान महिलाओ को बहुत ज्यादा खट्टा खाने का मन करता है, जो प्रग्नेंट होने की पहचान मानी जाती है।
  • कब्ज की शिकायत – प्रग्नेन्सी की शुरूआती लक्षणों में कब्ज की शिकायत भी है, इसमे आपकी पाचन क्रिया कमजोर पड़ जाती है। जिससे आपको उल्टी होना, पेट फुलाना, कब्ज जैसी समस्याओ का सामना करना पड़ सकता है। किन्तु यह सभी समस्या आमतौर पर भी हो सकती है इसलिए डॉक्टर से सलाह जरुर ले।
  • वजन बढ़ना – प्रग्नेन्सी के दौरान महिलाओ का वजन अचानक तेजी से बढ़ने लगता है, तथा पेट निकलने लगता है। क्योकि प्रग्नेन्सी के दौरान आपके पेट में पल रहे बच्चे का भी वजन बढ़ने लगता है, जिसके चलते महिलाओ का वजन बढ़ने के साथ ही उनका पेट निकलना आम बात हो जाता है।
  • ऐंठन होना – अगर आप प्रग्नेन्सी के दौर से गुजर रही है तो साधारण सी बात है की आपको ऐंठन जरुर महसूस होगी। वैसी ऐठन जो आपको मासिक धर्म के दौरान होती है। यह ऐठन पेट और पीठ के निचले हिस्से में होती है।
  • कमर में दर्द – क्या आपको पता है की प्रग्नेन्सी के समय गर्भाशय में खिचाव के कारण आपके कमर तथा पेट में दर्द होने लगता है।
  • रक्तस्त्राव – जब प्रग्नेन्सी रुक जाती है तो नियमित मासिक धर्म से ठीक आठ या नौ दिन पहले रक्तस्राव होता है परन्तु यह रक्तस्राव सामान्य पीरियड्स से काफी काम मात्रा में होता है।
  • Pregnancy Symptoms कितने दिन में दीखने लगते है– आमतौर पर प्रेगनेंसी के लक्षण 6 से 14 दिनों के बाद महसूस होने लगते है।

प्रेगनेंसी के पहले महीने भ्रूण का विकास (Fetuses develop in the first month of pregnancy in Hindi)

  • संभोग के बाद, निषेचन प्रक्रिया कुछ घंटों में हो सकती है। जैसा कि आगे उल्लेख किया गया है, जब अंडा और शुक्राणु दोनों एक दूसरे के संपर्क में आते हैं, तो बच्चे का निर्माण शुरू होता है, इस प्रक्रिया को युग्मनज कहा जाता है।
  • युग्मनज बनने के बाद, यह फैलोपियन ट्यूब के माध्यम से गर्भाशय में प्रवेश करता है। यह संचित मांसपेशियों में विभाजित होने लगती है और पोषण के लिए खुद को गर्भाशय की दीवार से जोड़ लेती है। जब प्लेसेंटा बनता है, तो भ्रूण अपने पोषण के लिए रक्त वाहिकाओं को बंद कर देता है।
  • गर्भावस्था के तीसरे और चौथे सप्ताह में भ्रूण का दिल धड़कने लगता है। हालांकि तब भ्रूण मटर की तरह होता है, लेकिन उसमें बच्चे के फेफड़े, हाथ और पैर बनने लगते हैं। इसके बाद बच्चे का चेहरा बनने लगता है, फिर उस पर आंख, कान और नाक भी बनने लगते हैं।

प्रेगनेंसी के पहले महीने में कौन से टेस्ट करवाना चाहिए? (What test should be done in the first month of pregnancy)

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  • गर्भावस्था परीक्षण करने के लिए एचसीजी हार्मोन की उपस्थिति के लिए आपका डॉक्टर आपके मूत्र के नमूने का विश्लेषण कर सकता है। इसके अलावा ब्लड टेस्ट भी किया जा सकता है।
  • गर्भावस्था के जोखिम का पता लगाने के लिए डॉक्टर सीरम प्रोजेस्टेरोन का परीक्षण कर सकते हैं।
  • गर्भावस्था का पता लगाने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कर सकते हैं। इससे महिलाओं की अन्य बीमारियों जैसे मधुमेह का पता लगाया जा सकता है।
  • पैप परीक्षण उन कारणों का पता लगाने के लिए किया जाता है जो गर्भावस्था के दौरान समस्या पैदा कर सकते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान सावधानियां

  • टेस्ट के बाद सावधानी – पीरियड्स रुक जाने के बाद आप तुरंत ही प्रग्नेन्सी किट से चेक कर ले। चेक के दौरान अगर आप प्रेग्नेंट होती है तो आपको तीन से चार महीने तक सेक्स से बचना ही आपके लिए समझदारी होगी। नहीं तो आप मुश्किल में आ सकती है। आपको तब तक सेक्स के बारे में नहीं सोचना चाहिए जब तक आपका पीरियड्स सामान्य न हो जाय। इस समस्या के लिए मार्केट में बहुत सरे दवा आती है।
  • खेल-कूद ना करें – प्रग्नेन्सी पता चल जाने के बाद आपको ज्यादा खेल- कूद करने से बचाना चाहिए।
  • अधिक व्यायाम ना करें – यदि आप भी जिम या व्यायाम की शौक रखती है तो आप इसे करने से बच्चे नहीं तो आपके लिए यह खतरा साबित हो सकती है।
  • दवाइयों का सेवन – प्रग्नेन्सी के दौरान दवाइयों का का सेवन करना अच्छा नहीं माना जाता है, इसलिए दवाइयों का सेवन करने से बचे। और घरेलु नुस्खे ही कोशिश करे।
  • भारी सामान ना उठाएं – प्रेग्नेंट हो जाने के बाद आप भारी सामान उठाने से बचे नहीं तो आपके लिए खतरा साबित हो सकता है।

गर्भावस्था के पहले महीने में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • अपने आहार में अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।
  • गर्भावस्था के दौरान खूब सारे तरल पदार्थ और पानी पिएं।
  • गर्भावस्था के दौरान कुछ हलचल होनी चाहिए और हल्का व्यायाम किया जा सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान आपको पर्याप्त नींद लेनी चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान, योनि में संक्रमण को रोकने के लिए योनि की स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए।

Pregnancy Symptoms: पीरियड्स मिस होने के कितने दिन बाद Pregnency Test Kare?

Pregnency test kb kre? प्रग्नेन्सी चेक करना है तो आपको जल्दीबाजी नहीं करना है क्योकि पीरियड्स रुक जाने के बाद अगर आप एक या दो दिन के अन्दर चेक करती है तो आप प्रग्नेंट हो जाने के बाद भी टेस्टिंग के दौरान नेगटिव आ सकती है। इसलिए आप पीरियड्स रुकने के सातवें या आठवें दिन चेक करे ताकि आपको सही रिजल्ट पता हो सके। जिससे आपकी समस्या दूर हो सके।

मैं खुद से गर्भावस्था की जांच कैसे कर सकती हूं?

अगर आप चेक करना चाहती हैं कि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं तो इसके लिए आपको मार्केट में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट उपलब्ध करानी होगी। इसके बाद आपको किट पर अपना यूरिन डालना है, अगर आपके यूरिन का रंग बदलने लगे तो आप प्रेग्नेंट हैं।

प्रग्नेन्सी रोकने के लिए कौन सी गोली खानी चाहिए?

प्रग्नेन्सी रोकने के लिए आप यूलीप्रिस्टल (Ulipristal) का इस्तेमाल कर सकती है। एक और दवा है इसके लिए जिसका नाम है लेवेनरजेस्ट्रेल (Levenerjestrel) जिसका आप प्रग्नेन्सी रोकने के लिए इस्तेमाल कर सकती है।

मुझे उम्मीद है आपको इस पोस्ट में Pregnancy Symptoms in Hindi, गर्भावस्था के लक्षण (Pregnancy Ke Lakshan), प्रेगनेंसी का पहला महीना, Ladki Pregnant Kab Hoti Hai, और इससे जुडी साड़ी जानकारियां प्राप्त हो गयी होंगी। अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों में शेयर करे तथा इससे आपको थोड़ी सी भी लाभ हुआ हो तो comment जरुर करे। ऐसे ही रोचक जानकारी के लिए आप हमारे Website Gotrends पर जा सकते है।

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