BPO Full Form | बीपीओ क्या है? (BPO Kya Hai?), Meaning, Definition, BPO vs Call Center

बीपीओ का फुल फॉर्म (BPO Full Form) Business Process Outsourcing होता है। बीपीओ बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग का संक्षिप्त नाम है। जिसका मतलब है की कंपनियां व्यावसायिक प्रक्रियाओं को किसी तृतीय-पक्ष बाहरी (third-party) कंपनी को आउटसोर्स करती हैं। Business process outsourcing (BPO) तीसरे पक्ष के विक्रेताओं को विभिन्न व्यवसाय-संबंधित कार्यों को ठेकेदारी करने का एक तरीका है।

यह सेवाओं या व्यावसायिक प्रक्रियाओं के एक बाहरी प्रदाता के लिए एक कंपनी का अनुबंध है। यह एक लागत-बचत उपाय है जो कंपनियों को गैर-मुख्य कार्यों को आउटसोर्स करने की अनुमति देता है। आइये इस article में, हम BPO Full Form, Meaning, Types, Definition, Services, और BPO vs Call Center के बारे में जानेंगे।

BPO क्या होता है? (What is BPO?)

बीपीओ यानी बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग, यह बिजनेस डीलिंग की एक प्रक्रिया है जहां एक संगठन अपना काम पूरा करने के लिए दूसरी कंपनी को काम पर रखता है। जो किसी कंपनी का कोर बिजनेस होता है और इस कोर बिजनेस के अलावा कोई भी अतिरिक्त काम जो उस कंपनी को चाहिए होता है।

BPO Full Form

लेकिन अगर वह उस कंपनी का हिस्सा नहीं है तो ऐसे में कंपनी यह अतिरिक्त काम किसी और दूसरी कंपनी को सौंप देती है, यह पूरी प्रक्रिया बीपीओ को कहां जाती है.

BPO Full Form | Definition

  • BPO Full Form: Business Process Outsourcing (बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग)
  • BPO Definition: बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग से तात्पर्य किसी विशेष कार्य या व्यवसाय के हिस्से को अनुबंध पर तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाता को देना है।

BPO Meaning | BPO Full Form

अब तक तो आप BPO Full Form और Definition जान चुके है। आइये अब BPO Meaning detail में जान लेते है। दोस्तों, जैसा की मेने पहले बताया की बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग से तात्पर्य किसी विशेष कार्य या व्यवसाय के हिस्से को अनुबंध पर तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाता को देना है। बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग किसी भी बिजनेस को सही तरीके से चलाने और चलाने में काफी मददगार साबित होती है।

एक व्यवसायी इस सेवा का उपयोग करके अपने व्यवसाय के मूल कार्य पर पूरा ध्यान दे सकता है और व्यवसाय का दूसरा कम महत्वपूर्ण हिस्सा अनुबंध के आधार पर किसी तीसरे पक्ष को दे सकता है, जिससे उसका काम बहुत आसान हो जाता है।

बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) को आसान भाषा में समझें।

उदाहरण के लिए, मान लें कि एक सॉफ्टवेयर कंपनी है जिसका काम सॉफ्टवेयर बनाना, रखरखाव करना और बेचना है। इस कंपनी में कुल 800 कर्मचारी हैं, और अब इसे अपने ग्राहकों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए एक कॉल सेंटर की आवश्यकता है जहां 100 लोग फोन पर ग्राहकों की समस्या का समाधान कर सकें।
इसके लिए कंपनी के पास दो विकल्प हैं, या तो अपना खुद का स्थान बनाएं, और लोगों को कॉल सेंटर के रूप में काम करने के लिए किराए पर लें, या अपने कॉल सेंटर के काम को कॉल सेंटर विशेषज्ञ कंपनी को संपर्क करें।

जैसा की आप यहां देख सकते हैं कि उस सॉफ्टवेयर कंपनी का कार्यालय बनाने का खर्च, कर्मचारियों को काम पर रखने और उन्हें प्रशिक्षण देने का खर्च, सब कुछ बच जाता है, और कोई एजेंसी बहुत कम पैसे में अपना कॉल सेंटर का काम शुरू कर देती है।

In short, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग किसी भी कंपनी के लिए समय और पैसा दोनों बचा सकता है। ऐसा मानना है की बहुत से लोग बीपीओ को कॉल सेंटर मानते हैं, जबकि ऐसा बिलकुल भी नहीं है। कई सेवाएं बीपीओ के अंतर्गत आ सकती हैं, जिनमें से कई तकनीकी भी शामिल हैं।

BPO दूसरे कंपनियों को क्यों आकर्षित करती है?

कंपनियां अक्सर बीपीओ की ओर आकर्षित होती हैं क्योंकि यह उन्हें अधिक operational flexibility प्रदान करती है। बीपीओ व्यवसायों को नवीन तकनीकी संसाधनों तक पहुंच प्रदान करता है, जिनका अन्यथा उनके पास जोखिम नहीं हो सकता है। बीपीओ भागीदार और कंपनियां नवीनतम तकनीकों और प्रथाओं को अपनाकर अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करने का लगातार प्रयास करती हैं।

बीपीओ कितने प्रकार के होते हैं? (What Are the Types of BPO?)

दोस्तों, अब तक तो आप जान चुके है की BPO kya hai? आइये अब Types of BPO भी जान लेते है। BPO को काम और System के हिसाब से 3 भाग में बाटा गया है। आजकल कम्पनिया इन तीनो प्रकार को उपयोग करती है।

  1. Offshore Outsourcing: एक देश की कंपनी दूसरे देश की कंपनी को अपनी सेवाएं प्रदान करने का काम सौंपती है, दूसरे देश की कंपनी के साथ समझौता करती है, इस प्रक्रिया को ऑफशोर आउटसोर्सिंग कहा जाता है।
  2. Onshore Outsourcing: एक कंपनी दूसरी कंपनी को अपनी सेवाएं प्रदान करने का काम सौंपती है, जिसमें दोनों कंपनियां एक ही देश की हों। इस प्रक्रिया को ऑनशोर आउटसोर्सिंग और डोमेस्टिक (घरेलू) आउटसोर्सिंग कहा जाता है।
  3. Nearshore Outsourcing: एक कंपनी अपने आसपास की स्थानीय कंपनी को अपनी सेवाएं प्रदान करने का काम देती है, इस प्रक्रिया को नियरशोर आउटसोर्सिंग कहा जाता है।

BPO Category | BPO Full Form

बीपीओ की दो श्रेणियां हैं, जिनके उपयोग से कोई व्यवसाय अपनी गैर-प्रमुख गतिविधियों को किसी तीसरे पक्ष को transfer कर सकता है।

1. Back Office Outsourcing

BPO की इस प्रक्रिया में आंतरिक व्यावसायिक (Internal Business) कार्य शामिल हैं। इस प्रकार के कार्यों को संभालने के लिए तीसरे पक्ष के कर्मचारियों में विशिष्ट तकनीकी कौशल की आवश्यकता होती है।

जैसे कुछ प्रमुख कार्य –

  • Human Resources
  • Finance and Accounting
  • IT solutions

2. Front Office Outsourcing

BPO की इस प्रक्रिया में व्यावसायिक कार्य शामिल हैं, जो ग्राहक के कामकाज से संबंधित हैं। आपको बता दे की यहां तीसरे पक्ष के कर्मचारियों को सामान्य संचार कौशल की आवश्यकता होती है न कि विशिष्ट तकनीकी कौशल की।

कई बार तो लोग ऐसी आउटसोर्सिंग को कॉल सेंटर समझते हैं, जो की गलत है। कुछ प्रमुख कार्य जैसे –

  • Sales
  • Customer support
  • Technical Support

बीपीओ का लक्ष्य क्या है और इसकी जरुरत क्यों है?

बीपीओ का लक्ष्य क्या है? बीपीओ बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग का संक्षिप्त नाम है, जिसका मतलब है कि जब कंपनियां बिजनेस प्रोसेस को थर्ड-पार्टी कंपनी को आउटसोर्स करती हैं।

  • कुशल और लागत कम करना
  • समय को बचाना
  • व्यवसाय के मुख्य पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना
  • बाहरी विशेषज्ञता
  • कंपनी का लचीलापन बढ़ाएं
  • आय आदि में वृद्धि

बीपीओ में करियर (Career In BPO)

दोस्तों, BPO में अगर आप अपना करियर बनाना चाहते है तो BPO Jobs के लिए अप्लाई कर सकते है। सबसे पहले आपको यह तय करना बहुत ही जरूरी है कि आप इसको long term करियर के रूप में देख रहे है या short term में। आपको बता दे की आप इसे long term करियर के रूप में तभी देखे जब आपके पास कोई professional degree ना हो और किसी दूसरे क्षेत्र में आपको काम मिलने के मौके बहुत कम हो।

भारत में बीपीओ (BPO in India)

दोस्तों, आज, दुनिया भर से कई multinational कंपनियां अपनी कई सेवाओं को आउटसोर्स करती हैं। भारत में बीपीओ कंपनियों को आउटसोर्सिंग का बड़ा हिस्सा देखने को मिलता है।

भारत में कई बीपीओ कंपनियां हैं. इसका कारण यह है की भारत का रुपया डॉलर के मुकाबले बहुत कम है। इसलिए विदेशी कंपनियों को भारत में अपने कारोबार को आउटसोर्स करना बहुत सस्ता लगता है।

यह भारत में BPO कंपनियों के लिए भी एक अच्छा opportunity है क्योंकि भारत में बहुत से युवा पढ़ाई करने के बाद नौकरी की तलाश में हैं। उनके लिए BPO में नौकरी पाना थोड़ा आसान है। आपको बता दे की अकेले भारत में, लगभग 5 मिलियन से अधिक लोग बीपीओ कंपनियों में काम करते हैं।

बीपीओ के क्या फायदे हैं? (BPO Advantages)

ऐसे देखा जाए तो बीपीओ के कई सरे फायदे हैं। जैसे –

  • प्राथमिक लाभों में से एक यह है कि यह लागत कम करता है।
  • एक निश्चित कार्य को करने में आंतरिक रूप से एक specific amount खर्च होती है।
  • बीपीओ इस कार्य को बाहरी पार्टी को आउटसोर्स करके लागतों को कम कर सकता है।
  • कंपनी को मुख्य व्यावसायिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति दी जाती है जो इसकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • बीपीओ विकास में भी मदद करता है, खासकर वैश्विक विस्तार में।
  • यदि कोई कंपनी विदेशी शाखा खोलने या विदेशों में संचालन करने में रुचि रखती है, तो स्थानीय उद्योग में अनुभव रखने वाली और भाषा बोलने वाली बीपीओ कंपनी का उपयोग करना बेहद फायदेमंद है।

बीपीओ के क्या नुकसान हैं? (BPO Disadvantages)

बीपीओ के जहां कई फायदे हैं, वहीं कुछ नुकसान भी हैं। जैसे –

  • एक व्यवसाय जो अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं को आउटसोर्स करता है, डेटा उल्लंघनों (data breaches) का खतरा हो सकता है।
  • संचार संबंधी समस्याएं हो सकती हैं जो परियोजना के पूरा होने में देरी करती हैं।
  • ऐसे में व्यवसाय बीपीओ प्रदाताओं की चल रही लागत को underestimate कर सकते हैं।

BPO और Call Center में क्या अंतर है? (BPO vs Call Center)

जैसा की मैंने ऊपर बताया की बहुत से लोगों का यह मानना है कि BPO और Call Center एक होता है और दोनों का work process भी समान होता है, जो की गलत है। जबकि ये एक दूसरे से बहुत भिन है। Call Center एक BPO का हिसा है। और दोनों के काम एकदम अलग है।

  • बीपीओ ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से किया जा सकता है, लेकिन कॉल सेंटर ऑनलाइन ही किया जाता है।
  • कॉल सेंटर में केवल कॉल करना और प्राप्त करना शामिल है, लेकिन बीपीओ में मेल, मीटिंग, प्रिंटिंग, दस्तावेज़, कॉल आदि शामिल हैं।
  • बीपीओ एक प्रणाली की तरह काम करता है जिसका उद्देश्य आपके व्यवसाय की उत्पादकता में वृद्धि करना है, जबकि कॉल सेंटर में आपके ग्राहक की मदद करना और उत्पाद को बढ़ावा देना शामिल है।
  • बीपीओ में नौकरी पाने के लिए कंप्यूटर का ज्ञान और अच्छी अंग्रेजी का ज्ञान अनिवार्य है, लेकिन कॉल सेंटर में कंप्यूटर का बुनियादी ज्ञान और संचार कौशल होना जरूरी है।
  • बीपीओ में आईटी, वित्त, बिलिंग आदि जैसे अलग-अलग विभाग होते हैं, लेकिन कॉल सेंटर में केवल एक कॉल करने वाला विभाग होता है।

कुछ अन्य BPO Full Form

  • BPO – Broker Price Opinion- In the stock market
  • BPO – Business Process Outsourcing- in Business
  • BPO – Bankers Pay Order- in Banking

दोस्तों उम्मीद है कि आप समझ गए होंगे कि BPO Full Form क्या होता है? और इसमें किस तरह का काम किया जाता है। हमने यहां सभी आवश्यक जानकारी के बारे में बताया है। तो इसके बारे में कमेंट कर के जरूर बताएं।

BPO Full Form से जुड़े कुछ सवाल (FAQs)

BPO kya hai?

बीपीओ यानी बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग, यह बिजनेस डीलिंग की एक प्रक्रिया है जहां एक संगठन अपना काम पूरा करने के लिए दूसरी कंपनी को काम पर रखता है।

What is BPO?

BPO is the abbreviation for business process outsourcing, which refers to when companies outsource business processes to a third-party (external) company. The primary goal is to cut costs, free up time, and focus on core aspects of the business.

What is the full form of BPO?

Business process outsourcing

What is BPO in Hindi?

बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग

What is BPO in simple meaning?

In short, business process outsourcing can save both time and money for any company.

यह भी पढ़े:

Leave a Comment